GST: अप्रैल 2026 का रिकॉर्ड कलेक्शन, 52वीं काउंसिल के फैसले और नए नियम – पूरी जानकारी
1. अप्रैल 2026 का GST कलेक्शन – नया कीर्तिमान
1 मई 2026 को सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में कुल ग्रॉस GST कलेक्शन ₹2.42 लाख करोड़ रहा। यह पिछले वर्ष अप्रैल 2025 के ₹2.23 लाख करोड़ की तुलना में 8.7 प्रतिशत अधिक है। इस महीने का कुल कलेक्शन मार्च 2026 के ₹2 लाख करोड़ से भी काफी ज्यादा है।
कलेक्शन का ब्रेकडाउन:
केंद्रीय जीएसटी (CGST): ₹49,341 करोड़
राज्य जीएसटी (SGST): ₹57,580 करोड़
एकीकृत जीएसटी (IGST): ₹1,12,514 करोड़
उपकर (Cess): ₹22,587 करोड़
खास बात यह है कि इस बार आयात से होने वाले IGST संग्रह में 25.8% की जबरदस्त वृद्धि हुई और यह ₹57,580 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं घरेलू कारोबार से जीएसटी संग्रह में 4.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। नेट जीएसटी राजस्व (रिफंड निकालने के बाद) ₹2.11 लाख करोड़ रहा, जो पिछले साल से 7.3% अधिक है।
विशेषज्ञों की राय: डेलॉयट इंडिया के माहेश जयसिंह के अनुसार, ये आंकड़े GST ढांचे की परिपक्वता को दर्शाते हैं। ईवाई इंडिया के सौरभ अग्रवाल का कहना है कि घरेलू और आयात-आधारित GST के बीच बढ़ता अंतर ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की नीतियों पर पुनर्विचार की आवश्यकता को इंगित करता है।
2. 52वीं GST काउंसिल की बैठक – अहम फैसले
हाल ही में 52वीं GST काउंसिल की बैठक संपन्न हुई, जिसमें कई ऐसे फैसले लिए गए जिनका सीधा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक के बाद प्रमुख निर्णयों की जानकारी दी:
किसानों को राहत: गुड़ के रस (मोलासेस) पर GST की दर 28% से घटाकर 5% कर दी गई है। इससे गन्ना किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
पोषण को बढ़ावा: 70% बाजरा (मिलेट) युक्त आटे पर GST को शून्य प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, पैक किए गए और ब्रांडेड फॉर्म में यह 5% के दायरे में रहेगा।
GST अपीलीय ट्रिब्यूनल: ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष की आयु सीमा 67 से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। सदस्यों के लिए यह सीमा 65 से बढ़ाकर 67 वर्ष की गई है।
शराब उद्योग पर बड़ा फैसला: अतिरिक्त न्यूट्रल अल्कोहल (ENA), जिसका उपयोग शराब बनाने में होता है, को GST के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है। इसका मतलब है कि इस पर राज्य अपना अलग वैट लगा सकेंगे।
रेलवे को राहत: रेलवे को मिलने वाली विभिन्न सेवाओं (जल आपूर्ति, सफाई, ठोस कचरा प्रबंधन) को GST से छूट देने की सिफारिश की गई है।
3. GSTR-3B में मैन्युअल एडिट पर लगाम लगाने की तैयारी
सरकार अब GSTR-3B रिटर्न फॉर्म में मैन्युअल एडिटिंग की सुविधा को खत्म करने पर विचार कर रही है। यह सुविधा तब बंद कर दी जाएगी जब रिटर्न GSTR-1 और GSTR-2B के माध्यम से ऑटो-पॉपुलेट हो जाएगा।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य टैक्स चोरी पर रोक लगाना और सप्लायर द्वारा डिफॉल्ट करने पर होने वाली इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) विसंगतियों को कम करना है। कर विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कानूनी विवाद कम होंगे, लेकिन सप्लायर स्तर की छोटी-मोटी गलतियों के कारण उत्पन्न होने वाली असुविधाओं पर भी ध्यान देना होगा। यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए GST काउंसिल के पास भेजा जाएगा।
4. फ्लिपकार्ट डिलीवरी चार्ज पर 18% GST लगेगा
ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट को पश्चिम बंगाल GST अथॉरिटी से बड़ा झटका लगा है। अपीलीय अथॉरिटी ने फ्लिपकार्ट की स्पष्टीकरण याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी का डिलीवरी मॉडल गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी (GTA) के दायरे में नहीं आता है। इसलिए उस पर 18% GST देय होगा।
यह आदेश दिसंबर 2025 के उस फैसले को पलटता है जिसमें फ्लिपकार्ट को GST छूट दे दी गई थी। यह फैसला पूरे ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए एक मिसाल पेश करता है, क्योंकि अब अन्य कंपनियों के डिलीवरी चार्ज पर भी इसी तरह टैक्स लगने की संभावना है।
5. फर्जी GST फर्मों के नेटवर्क का भंडाफोड़
13 मई 2026 को हमीरपुर पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया, जो नौकरी के नाम पर युवाओं के आधार-पैन कार्ड लेकर फर्जी GST फर्में खोल रहा था। दिल्ली में रहने वाले बिहार मूल के एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
जांच में करीब 7 करोड़ रुपये के फर्जी कारोबार और 1.40 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के मामले सामने आए हैं। आरोपियों से बड़ी संख्या में आधार कार्ड, पैन कार्ड और GST आवेदन मिले हैं। यह घटना GST पंजीकरण प्रक्रिया में सख्ती की आवश्यकता को दर्शाती है।
6. 1 अप्रैल 2026 से लागू नए GST नियम
1 अप्रैल 2026 से कई महत्वपूर्ण GST नियम लागू हो गए हैं, जिन्हें हर कारोबारी को जानना आवश्यक है:
ई-इनवॉयसिंग दायरा बढ़ा: अब जिन व्यापारियों का वार्षिक टर्नओवर ₹5 करोड़ से अधिक है, उनके लिए ई-इनवॉयसिंग अनिवार्य हो गई है। पहले यह सीमा ₹10 करोड़ थी।
इनवॉइस की नई सीरीज: सभी व्यापारियों को नए वित्त वर्ष के लिए इनवॉइस की नई सीरीज शुरू करनी होगी। पुरानी सीरीज जारी रखने पर रिटर्न फाइल करने में समस्या हो सकती है।
निर्यात के लिए LUT अनिवार्य: निर्यातकों को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LUT) दाखिल करना अनिवार्य है।
ITC रिवर्सल का सख्त नियम: इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट रिवर्सल स्टेटमेंट (ECRS) में सटीक एंट्री करना अनिवार्य हो गया है, अन्यथा रिटर्न फाइल नहीं हो पाएगा।
7. GST 2.0 के प्रभाव और आगे की चुनौतियाँ
सितंबर 2025 में लागू GST 2.0 के तहत चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) किया गया है। तंबाकू उत्पादों और कुछ लग्जरी वस्तुओं के लिए 40% की अधिकतम दर रखी गई है।
हालाँकि, GST 2.0 में दरों के इस बड़े बदलाव के कारण कई क्षेत्रों में ‘इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर’ (उल्टी कर संरचना) बन गई है। इससे पूंजी लॉक हो रही है और स्थानीय उत्पादन की लागत बढ़ रही है। यह मुद्दा भारत के EU और US के साथ नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के संदर्भ में और भी अहम हो गया है।
निष्कर्ष
GST व्यवस्था में लगातार सुधार किए जा रहे हैं। रिकॉर्ड कलेक्शन, काउंसिल के फैसले, नियमों में बदलाव और ई-कॉमर्स से जुड़े मामले बताते हैं कि GST अब एक परिपक्व कर प्रणाली के रूप में विकसित हो रही है। व्यापारियों और आम नागरिकों को इन बदलावों से अवगत रहना चाहिए ताकि किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सके।

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