इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्या है? – पूरी जानकारी
Input Tax Credit (ITC) का मतलब है कि आपने जो GST खरीद पर दिया है, उसे बेचने पर देय GST से घटा सकते हैं। इससे टैक्स पर टैक्स (cascading effect) खत्म हो जाता है।
ITC कैसे काम करता है (उदाहरण):
आप एक उत्पाद (जैसे मोबाइल) ₹10,000 में खरीदते हैं, जिसमें 18% GST (₹1800) है। फिर आप उसे ₹15,000 में बेचते हैं, 18% GST (₹2700) वसूलते हैं। अब आपको सरकार को 2700 में से 1800 माफ़ (क्रेडिट) मिल जाता है – सिर्फ ₹900 चुकाने होंगे।
ITC लेने की शर्तें:
- आपके पास GST पंजीकरण होना चाहिए
- आपको GST पोर्टल पर रिटर्न फाइल करना चाहिए (GSTR-3B)
- आपकी खरीद पर टैक्स इनवॉइस (valid GST invoice) होना चाहिए
- आपने अपने सप्लायर का GST भुगतान किया हो (उसने रिटर्न फाइल किया हो)
- खरीदा गया माल या सेवा आपके व्यवसाय में इस्तेमाल हो (पर्सनल इस्तेमाल पर नहीं)
क्या चीज़ें ITC के लिए पात्र नहीं हैं?
- मोटर वाहन (कुछ अपवाद जैसे ट्रांसपोर्ट बिजनेस)
- कर्मचारियों को दी जाने वाली खाने-पीने की व्यवस्था
- पर्सनल इस्तेमाल की वस्तुएँ
- कंपोज़िशन स्कीम वाले व्यवसाय
- फ्री या डोनेशन में दी गई वस्तुएँ
ऑनलाइन ITC कैसे चेक करें?
- GST पोर्टल पर GSTR-2B (एक माह का क्रेडिट सारांश) देखें।
- GSTR-2A (सप्लायर द्वारा अपलोड किए गए इनवॉइस) से मिलान करें।
- यदि कोई विसंगति हो, तो नोटिस आ सकता है।
नियम 2025 अपडेट:
- ITC का क्रेडिट अब केवल उस माह में लिया जा सकता है जब सप्लायर ने रिटर्न फ़ाइल कर दिया हो (gst.gov.in पर नियम 36(4))
- पुराने ITC (1 साल पुराना) का क्लेम नहीं कर सकते
टिप: हमेशा अपने सप्लायर से टैक्स इनवॉइस और पेमेंट प्रूफ संभाल कर रखें।

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